बैंक रिकंसिलिएशन › बैलेंस में फ़र्क क्यों
बैंक बैलेंस आपकी बही से अलग क्यों है
ज़्यादातर फ़र्क समय का होता है, कुछ बैंक की एंट्री होती हैं जो आपने नहीं कीं, और कुछ गलतियाँ। इन्हें कैसे अलग पहचानें।
फ़र्क के दो प्रकार
बही और बैंक में फ़र्क हमेशा गलती नहीं होता। ज़्यादातर फ़र्क समय का होता है: वही पैसा बही और बैंक में अलग-अलग दिन पहुँचता है।
समय का फ़र्क: बही में है, बैंक में अभी नहीं
- दिए गए चेक, अभी लगे नहीं। सप्लायर आपका चेक कुछ दिन या हफ़्ते बाद जमा कर सकता है। चेक अपनी तारीख से तीन महीने तक वैध होता है; लंबे समय से कैश न हुए चेक पर पाने वाले से बात करें।
- जमा किए चेक, अभी क्लियर नहीं। 4 अक्टूबर 2025 से चेक Cheque Truncation System में लगातार क्लियर होते हैं, इसलिए दिन के सेशन में जमा चेक अक्सर उसी कामकाजी दिन क्रेडिट हो जाता है। महीने के आखिरी दिन देर से हुए जमा फिर भी अगले स्टेटमेंट में दिखते हैं।
- बैंक के कट-ऑफ़ समय के बाद जमा कैश जो अगले कामकाजी दिन दिखता है।
बैंक में है, बही में अभी नहीं
- बैंक चार्ज: SMS अलर्ट, चेक बुक, NEFT या RTGS चार्ज, मिनिमम बैलेंस चार्ज, कार्ड की सालाना फ़ीस। बैंक फ़ीस पर GST लगता है; अगर बैंक के पास आपका GSTIN है, तो वह GST इनपुट टैक्स क्रेडिट में लिया जा सकता है, इसलिए बैंक से GST इनवॉइस माँगें।
- क्रेडिट हुआ ब्याज सेविंग्स पर या खाते से जुड़ी FD पर।
- सीधी आमदनी: ग्राहक जो बिना बताए UPI, NEFT या IMPS से पैसे भेजते हैं, या किसी दूसरी ब्रांच में ग्राहक का कैश जमा।
- सीधे डेबिट: लोन EMI, बीमा प्रीमियम, NACH मैंडेट, स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन।
- लौटे चेक: आपका जमा किया चेक जो बिना पेमेंट वापस आया, अक्सर रिटर्न चार्ज के साथ।
गलतियाँ
- गलत टाइप हुई रकम, जैसे 5,400 की जगह 4,500 (जो फ़र्क 9 से पूरा बँटे, उसका मतलब अक्सर दो अंक आपस में बदल गए)।
- एक ही रसीद दो बार लिखी गई, या बैंक का पेमेंट कैश बुक में लिखा गया।
- गलत महीने में एंट्री, या बैंक की गलती (कम होती है, पर तुरंत ब्रांच को बताएँ)।
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